What is history of Ram Mandir in hindi

 

What is history of Ram Mandir in Ayodhya

 

 

 

What is history of Ram Mandir in Ayodhya

इतिहास से… एक धार्मिक विवाद जिसका हुआ राजनीतिकरण

 

History of Ram Mandir  in hindi 

 

अयोध्या विवाद अपने शुरुआती वर्षों में

महज धर्म और आस्था से ही जुड़ा था। हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए यह आस्था से जड़ा था। धार्मिक मुद्दा 100 वर्षों के बाद धीरेधीरे राजनीतिक रंग लेने लगा। 1853 पहली बार अयोध्या में हुए दंगे माना जाता है कि अयोध्या मामले पर सबसे पहले दंगे वर्ष 1853 में हुए थे।

उस समय निर्मोही अखाड़ा ने दावा किया था कि मस्जिद की जगह मंदिर था। उसे बाबर शासनकाल में नष्ट कराया गया था। फैजाबाद गजट के अनुसार 1855 तक दोनों धर्मों के लोग एक ही इमारत में पूजा या इबादत करते रहे।

1859 अंग्रेजों ने किया परिसर का बंटवारा 1857 आंदोलन के चलते माहौल शांत हुआ। अवध हिंसा को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश शासकों ने वर्ष 1859 में मस्जिद के सामने दीवार बनाकर इसे दो हिस्सों में बांट दिया। परिसर के अंदरूनी हिस्से में मुस्लिम और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई।

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History of Ram Mandir in 1934

1934 पहली बार दीवार-गुंबद क्षतिग्रस्त

History of Ram Mandir  Ayodhya


1934 में एक बार फिर से दंगे भड़के, इसमें मस्जिद की दीवारों को ढहा दिया गया।

साथ ही गंबद को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इसका फिर से निर्माण कराया था।

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History of Ram Mandir in 1984

1984 से हुआ राजनीतिकरण

आजादी से पहले से शुरू हुआ अयोध्या विवाद अभी तक महज धार्मिक तौर पर ही विवादित था। इसमें राजनीति हावी नहीं हुई थी, लेकिन वर्ष 1984 से यह धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक विवाद भी बन गया।

इसका कारण भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक लालकृष्ण आडवाणी का इस विवाद में कूद पड़ना था। उनके इस विवाद में अग्रणी तौर पर आ जाने के कारण यह धार्मिक कम राजनीतिक मसला ज्यादा हो गया था।

रामजन्मभूमि को मुक्त कराने और राम मंदिर बनाने के उद्देश्य को लेकर विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया। इसी तरह, गोरखनाथ धाम के उस समय के महंत अवैद्यनाथ ने भी राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति की स्थापना कर दी। इस समिति के प्रमुख महंत अवैद्यनाथ ने लोगों और शिष्यों से
कहा कि वोट उसी पार्टी को दिया जाए, जो इस पवित्र स्थान को मुक्त कराएगी। इस मुहिम का नेतृत्व कुछ समय बाद लालकृष्ण आडवाणी ने किया था।

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History of Ram Mandir 

1986 राजीव गांधी ने खुलवाया ताला

 1986 में शाहबानो केस में राजीव सरकार के रवैये से हिंदू संगठन नाराज थे और उन्होंने इसे सरकार की तुष्टिकरण की नीति बताकर खिलाफत की थी।

तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने हिंदुओं को खुश करने के लिए विवादित भूमि के ताले को खुलवाया। 1989 राम मंदिर का शिलान्यास
1989 में भाजपा ने विहिप को समर्थन दिया। विहिप नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की ओर से मंदिर का दावा कोर्ट में पेश किया।

नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया।

 

Ayodhya history
 

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1990 में पहली कारसेवाऔर गोलीकांड

वर्ष 1990 में पहली बार अयोध्या में कारसेवा करते हुए मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया। तत्कालीन मुलायम सरकार के आदेश पर फायरिंग हुई, जिसमें कई कारसेवकों की मौत हो गई।

1991 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सरकार को यही आदेश भारी पड़ा और भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पहली बार सरकार बनाई, जिसमें कल्याण सिंह सीएम बने।


Ayodhya history of ram mandir


1991 भाजपा को मिली ‘प्राणवायु

इस विवाद ने भाजपा को राष्ट्रीय में पहचान दिलाने का काम किया। अगर इसे भाजपा की ‘प्राणवायु’ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

भाजपा ने मुद्दे के दम पर ही 1991 में यूपी में सरकार बनाई थी। इस मुद्दे को हमेशा की तरह अग्रणी रखते हुए वर्ष 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए।

 

Ram Janmabhoomi History


1992 ढांचा विध्वंस, पूरे देश में दंगे भड़के

वर्ष 1992 इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा याद रखा जाता है। 30-31 अक्टूबर 1992 को धर्मसंसद में कारसेवा की घोषणा हुई।

देशभर से कारसेवक रोज अयोध्या पहुंचने लगे। कोर्ट में तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने कोर्ट में मस्जिद की हिफाजत का हलफनामा भी दिया। बावजूद इसके 6 दिसंबर को ढांचा ढहा दिया गया। साथ ही, अस्थाई मंदिर का निर्माण भी कर दिया गया। इसके बाद देशभर में हुए सांप्रदायिक दंगों में दो हजार से ज्यादा लोगों की जान गई।
1992 में भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण
भाजपा ने 1992 के आम चुनाव में मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल किया।

घोषणा पत्र में कहा गया कि एक भव्य मंदिर लाखों लोगों का सपना है और राम की अवधारणा उनकी चेतना के मूल में निहित है। यह पहला मौका था, जब भाजपा ने इसे भुनाने का प्रयास किया।

Ayodhya Ram Mandir Case History

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2002
पीएम अटल बिहारी वाजपेयी
ने अयोध्या विवाद सुलझाने
के लिए एक समिति का गठन
किया।

2003

 कांची पीठ के शंकराचार्य ने मामला सुलझाने
के लिए मध्यस्थता की। लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया।

 

Ayodhya Ram Mandir Case History 2019

में सीजेआइ गोगोई ने रिटा.जस्टिस कलीफुल्ला कीअगुवाई में मध्यस्थता कमेटी का गठनकिया।अयोध्या विवाद
पर शनिवार को देश की सर्वोच्च अदालत जब अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी तो वह संभवतः विश्व के सबसे बड़े पुरातात्त्विक विवाद का भी समाधान करेगी।

100 साल से ज्यादा समय से चला आ रहा यह विवाद कभी धार्मिक तो कभी राजनीतिक रंग में रंगता रहा है पर कानून के दरवाजे पर यह साबित नहीं किया जा सका कि विवादित जमीन पर जो पुरातात्त्विक अवशेष मिले हैं, वे दरअसल किसके हैं? आज का फैसला पुरातात्त्विक दृष्टि से भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

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